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Kuch Pal Jeevan Ke Liye- a mesmerizing poetry collection by Satish 'Sarthk' Nangia
जिंदगी के कैनवास पर अमिट छाप छोड़ती श्री सतीश 'सार्थक' नांगिया रचित काव्य संकलन "कुछ पल जीवन से जीवन के लिए"
उनकी "फेसबुक" शीर्षक कविता युवाओं में खासी लोकप्रिय हो रिही है।
कुछ यूं शुरू होती है उनकी यह कविता:
मेरे ये लिखने को
शायद फेससबुक का लाइक न मिले
कहीं किसी की दिल्ली में कॉपी
लखनऊ में काकोरी कबाब
कहीं स्विटजरलैंड का स्टेज शो
वर्तमान दौर के हैरान परेशान युवा का दर्द बयां करते हुए वे आगे लिखते हैं:
कोई एयरपोर्ट पर है, तो कोई ढाबे पर
अपनी खास जिंदगी, अब आम हो गई है
जलवा तो खूब है इस आम हो गई है
जलवा तो खूब है इस मीडिया का पर
समझ ये नहीं आता कि
मुझे अपने जीवन के कुछ पल क्यों शेयर करने हैं?
इसी काव्य संकलन की निम्नलिखित कविता भी मन को छू जाती है:
इस विजय दशमी में भी
फिर कुछ रावण के पुतले जलेगे
मां दुर्गा फिर महिषासुर का वध करेंगी
पल, पल, हर क्षण
चौराहे, सड़कों पर आबादी के भीषण जंगल में,
अतिक्रमण से भरी
नारी पर अत्याचार में
कूड़े करकट के ढ़ेर में
अनपढ़ जनता की गरीबी में कितने ही रावण, महिषासुर मुंह बाए खड़े हैं
क्या हम उनका वध कर पाएंगे
या फिर हर साल की तरह, बुराई पर अच्छाई की जीत हो
पुतले जलाकर, मूर्ति विसर्जन करके
जलेबी खाकर चुपचाप सो जायेंगे
ऐसी ही कई अन्य खूबसूरत यथार्थवादी कविताओं से लबालब भरा है कवि सतीश सार्थक नांगिया का यह काव्य संकलन जो निरंतर सफलता, प्रसिद्धि और लोकप्रियता के सोपानों पर चढ़ता जा रहा है। यह काव्य संकलन सभी बुक स्टालों पर उपलब्ध है।
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